महोबा
बुंदेलखंड में बारिश से बांध लबालब, 23 से 25 सितंबर फिर बरसात के आसार
बुंदेलखंड में भारी बारिश से बांध लबालब हैं। 23 से 25 सितंबर के बीच फिर बारिश के आसार से किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ी है।
प्रकाश सक्सेना • महोबा •
मुख्य बातें
- महोबा: छह प्रमुख बांध पूरी क्षमता तक भरे, कबरई बांध का जलस्तर अधिकतम सीमा पार।
- ललितपुर: गोविंद सागर बांध के चार गेट खोलकर 1152 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
- आगे बारिश: 23–25 सितंबर के बीच फिर बारिश की संभावना; रबी की बुआई और फसलों पर असर की चिंता।
महोबा/ललितपुर। मानसून की विदाई की आहट के बीच बुंदेलखंड में बारिश ने इस बार जलसंकट की पुरानी तस्वीर काफी हद तक बदल दी है। लगातार हुई बारिश से महोबा के प्रमुख बांध अपनी क्षमता तक पहुंच गए हैं, जबकि ललितपुर के गोविंद सागर बांध से अतिरिक्त पानी की निकासी करनी पड़ रही है। अब मौसम विभाग ने 23 से 25 सितंबर के बीच एक बार फिर बारिश का दौर बनने के संकेत दिए हैं। इससे जहां जलस्रोतों के लिए राहत की उम्मीद है, वहीं खेतों में खड़ी फसलों और आने वाली रबी की तैयारियों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है।
महोबा में इस सीजन हुई बारिश का असर जिले के जलाशयों पर साफ दिखाई दे रहा है। अर्जुन, कबरई, उर्मिल, चंद्रावल, मझगवां और लहचूरा समेत छह प्रमुख बांध पानी से लबालब हैं। जिले में अब तक 968 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि सामान्य औसत करीब 565 मिलीमीटर है। यानी सामान्य से लगभग 70 प्रतिशत अधिक बारिश ने बुंदेलखंड के इस सूखाग्रस्त जिले की जल तस्वीर बदल दी है।
कबरई बांध पर विशेष नजर
लगातार बारिश के कारण कबरई बांध का जलस्तर अधिकतम सीमा को पार कर चुका है। बांधों में पर्याप्त पानी पहुंचने से आने वाले महीनों में पेयजल और सिंचाई के लिए राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन अतिरिक्त पानी की स्थिति में आसपास के क्षेत्रों में जलभराव और निकासी की चुनौती भी बनी हुई है। प्रशासन की निगाह बांधों के जलस्तर और निचले इलाकों पर बनी हुई है।
ललितपुर में गोविंद सागर से पानी की निकासी
ललितपुर में भी बारिश का असर जलाशयों पर दिखाई दे रहा है। गोविंद सागर बांध में पानी की आवक बढ़ने के बाद चार गेट दो-दो फीट खोले गए हैं। बांध से करीब 1152 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इससे नदी-नालों के आसपास के क्षेत्रों में जलस्तर पर नजर रखने की जरूरत बढ़ गई है।
बुंदेलखंड के दूसरे जिलों में भी लगातार बारिश के बाद खेतों और जलस्रोतों की स्थिति बदली है। कई स्थानों पर जलभराव से आवागमन प्रभावित हुआ है, जबकि निचले इलाकों में खेतों तक पानी पहुंचने से किसानों को फसल नुकसान की आशंका है।
अब 23 से 25 सितंबर फिर बारिश का अनुमान
मानसून की वापसी पश्चिमी राजस्थान से शुरू हो चुकी है, लेकिन बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के आसपास बन रहे नए मौसम तंत्र का असर उत्तर प्रदेश पर पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 23 से 25 सितंबर के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में दोबारा बारिश का दौर बनने के आसार हैं।
बुंदेलखंड के लिए यह बारिश दोहरी स्थिति पैदा कर सकती है। एक तरफ बांधों और जलाशयों में पानी की उपलब्धता आगे के महीनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी, तो दूसरी तरफ लगातार नमी और बारिश से खरीफ की फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।
रबी की तैयारी पर भी असर
सितंबर के अंतिम दिनों में होने वाली बारिश का सीधा संबंध किसानों की अगली फसल की तैयारियों से है। खेतों में अत्यधिक नमी रहने पर रबी की बुआई का समय प्रभावित हो सकता है। गेहूं, चना और सरसों की बुआई से पहले किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकलने और मिट्टी में नमी की स्थिति का इंतजार करना पड़ सकता है।
बुंदेलखंड में लंबे समय से सूखे और पानी की कमी की समस्या रही है। ऐसे में इस साल जलाशयों का भरना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण बदलाव है, लेकिन विशेषज्ञों के लिए चुनौती यह है कि इस अतिरिक्त पानी का सुरक्षित भंडारण और सिंचाई में प्रभावी उपयोग कैसे किया जाए।
फिलहाल क्षेत्र में प्रशासन की नजर बांधों के जलस्तर, निचले इलाकों में जलभराव और संभावित बारिश पर है। अगले कुछ दिन बुंदेलखंड के लिए इसलिए अहम माने जा रहे हैं कि सितंबर के आखिरी दौर की बारिश जलस्रोतों को और समृद्ध करेगी या पहले से भरे जलाशयों के सामने निकासी की चुनौती बढ़ाएगी।
संपादक: प्रकाश सक्सेना • बुंदेलखंड खबर