महोबा
जैतपुर में खाद के लिए उमड़ी किसानों की भीड़, व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
महोबा के जैतपुर में खाद लेने के लिए रात से ही बड़ी संख्या में किसान एसके महाविद्यालय परिसर में जुटे। भीड़ बढ़ने पर पुलिस को व्यवस्था संभालनी पड़ी। प्रशासन के अनुसार जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन स्थानीय स्तर पर मांग और वितरण के दबाव के चलते किसानों को इंतजार करना पड़ रहा है।
प्रकाश सक्सेना • महोबा •
मुख्य बातें
- रात से हजारों किसान खाद के लिए एसके महाविद्यालय परिसर में जुटे।
- भारी भीड़ के बीच पुलिस तैनात, वितरण व्यवस्था संभालने की कोशिश।
- जिले में स्टॉक पर्याप्त होने का प्रशासन का दावा, लेकिन स्थानीय केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें और इंतजार।
महोबा। रबी फसलों की बुवाई की तैयारी के बीच जैतपुर में खाद की मांग बढ़ने से वितरण केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है। एसके महाविद्यालय परिसर में खाद लेने के लिए किसान रात से ही जुटने लगे। गुरुवार को भी बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने से व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को मौके पर रहना पड़ा।
इससे पहले 28 सितंबर को भी जैतपुर के सहकारी संघ और पीसीएफ केंद्र पर सुबह से सैकड़ों किसान पहुंच गए थे। किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एसके महाविद्यालय परिसर से टोकन वितरण की व्यवस्था की गई थी। उस दौरान किसानों ने सड़क पर जाम लगाकर अपनी नाराजगी जताई थी। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में बाद में स्थिति सामान्य हुई।
खाद वितरण में किसानों की जरूरत और उपलब्ध मात्रा के बीच अंतर भी सामने आया। 28 सितंबर को दोनों केंद्रों पर 500-500 बोरी खाद उपलब्ध होने की जानकारी दी गई थी और किसानों को निर्धारित मात्रा में खाद वितरित की गई। वहीं 3 अक्टूबर को अजनर में 400 किसानों को टोकन दिए गए, लेकिन उपलब्ध खाद के आधार पर 150 किसानों को ही खाद मिल सकी।
वहीं, जिला प्रशासन के अनुसार जिले में उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। 30 सितंबर की समीक्षा बैठक में कृषि विभाग ने 8,782 मीट्रिक टन यूरिया, 6,280 मीट्रिक टन डीएपी और 1,416 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध होने की जानकारी दी थी। प्रशासन ने रबी सीजन में किसानों को सुगमता से खाद उपलब्ध कराने के लिए नामित कार्मिकों की मौजूदगी में वितरण कराने के निर्देश भी दिए थे।
जैतपुर में इससे पहले भी खाद वितरण को लेकर किसानों की भीड़ सामने आ चुकी है। सितंबर की शुरुआत में करीब 200 किसान डीएपी नहीं मिलने के बाद लौटे थे, जिसके बाद नायब तहसीलदार ने वितरण केंद्र का निरीक्षण कर स्टॉक और वितरण संबंधी अभिलेखों की जांच की थी। जांच में रिकॉर्ड सही पाए जाने की बात प्रशासन की ओर से कही गई थी।
ऐसे में जैतपुर की मौजूदा स्थिति को केवल खाद की उपलब्धता या कमी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। जिले में उपलब्ध कुल स्टॉक, स्थानीय केंद्रों तक उसकी आपूर्ति, किसानों की वास्तविक मांग और वितरण की गति—इन सभी के बीच तालमेल इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू है।
रबी की बुवाई का समय नजदीक होने के कारण किसानों के लिए खाद समय पर मिलना महत्वपूर्ण है। अब प्रशासन और सहकारी संस्थाओं के सामने चुनौती यही है कि उपलब्ध खाद का वितरण पारदर्शी, सुचारु और किसानों की जरूरत के अनुरूप हो, ताकि उन्हें लंबी कतारों और बार-बार केंद्रों के चक्कर लगाने से राहत मिल सके।
संपादक: प्रकाश सक्सेना • बुंदेलखंड खबर