दमोह
दमोह और छतरपुर समेत 3 तैयार मेडिकल कॉलेजों में अटकी 300 डॉक्टरों की सीटें, पीपीपी मॉडल भी हुआ फ्लॉप
दमोह, छतरपुर और बुधनी में 1521 करोड़ रुपये से बने नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एनएमसी से मंजूरी न मिलने के कारण इस सत्र प्रवेश अटक गया है, जिससे 300 सीटें बंद पड़ी हैं।
बुंदेलखंड खबर डेस्क • दमोह •
दमोह, छतरपुर और बुधनी में करोड़ों रुपये की लागत से बने नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस सत्र भी पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) से मंजूरी न मिलने के कारण इन तीनों कॉलेजों की 300 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश बंद हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर हुई देरी और नीतिगत कमियों के कारण इन तैयार इमारतों में डॉक्टरों की भर्ती, फर्नीचर खरीदी और अन्य जरूरी संसाधन जुटाने का काम पूरी तरह अटक गया है।
इन तीन सरकारी कॉलेजों को 1521 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर तैयार किया गया है। अकेले दमोह जिले के कॉलेज पर प्रशासन 369 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। यहाँ डीन और सीनियर रेजिडेंट्स के पद स्वीकृत तो हैं, लेकिन एनएमसी की पहली ही जांच में कमियां मिलने के कारण इन्हें मान्यता नहीं मिली। इसके बाद विभाग की ओर से दोबारा आवेदन नहीं किया गया। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त धनराजू एस. ने इसकी पुष्टि की है कि मान्यता के लिए दोबारा आवेदन नहीं किया गया है। दमोह के डीन डॉ. अर्जुन सिंह का कहना है कि शासन के निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रशासनिक सुस्ती का सीधा असर क्षेत्र के युवाओं और मरीजों पर पड़ रहा है। डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए इस सत्र में प्रवेश के दरवाजे बंद हो चुके हैं। इसके साथ ही दमोह में नर्सिंग कॉलेज और 500 बिस्तरों वाले अस्पताल का काम भी रोक दिया गया है। दूसरी तरफ, पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल के तहत जिन 13 जिलों में मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित थे, उनमें से 9 जिलों में कोई भी निजी निवेशक नहीं मिला है, जिससे आम जनता को इलाज की आधुनिक सुविधाएं मिलने की उम्मीदें भी अधर में लटक गई हैं।
आगे की प्रक्रिया के तौर पर सरकार ने कागजी रिकॉर्ड दुरुस्त रखने के लिए दमोह कॉलेज को जबलपुर और छतरपुर कॉलेज को सागर के स्वशासी कॉलेज से जोड़ दिया है। हालांकि, धरातल पर अब तक चिकित्सा सेवाओं को लेकर कोई काम शुरू नहीं हो सका है। आने वाले समय में जब तक सरकार एनएमसी की कमियों को दूर कर दोबारा आवेदन नहीं करेगी और फैकल्टी भर्ती तथा अधूरी फर्नीचर खरीदी की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तब तक इन मेडिकल कॉलेजों का शुरू होना मुमकिन नहीं दिख रहा है।
संपादक: प्रकाश सक्सेना • बुंदेलखंड खबर