सागर
एमपी में मानसून की आखिरी परीक्षा: 33.1 इंच बारिश, कोटे से 11% पीछे, 21 सितंबर के बाद फिर तेज पानी के आसार
मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर है और अब तक 33.1 इंच बारिश हुई है। सामान्य कोटे से 11 प्रतिशत पीछे चल रहे प्रदेश में 21 सितंबर के बाद बारिश की गतिविधि फिर तेज होने के आसार हैं।
बुंदेलखंड खबर डेस्क • सागर •
मुख्य बातें
- मध्य प्रदेश में सीजन के दौरान अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से 11 प्रतिशत कम है।
- मौसम विभाग के अनुसार 20 सितंबर तक प्रदेश में किसी बड़े बारिश सिस्टम का असर नहीं रहेगा।
- 21 सितंबर के बाद चक्रवाती परिसंचरण और कम दबाव के क्षेत्र के कारण बारिश की गतिविधि फिर बढ़ने की संभावना है।
- जून महीने की कम बारिश अब भी भारी पड़ रही है क्योंकि जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम पानी गिरा था।
मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर है, लेकिन प्रदेश अभी भी बारिश के सामान्य आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है। सीजन में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य कोटे की 88.7 प्रतिशत है। सामान्य आंकड़ा 37.3 इंच है। यानी प्रदेश को सामान्य बारिश का आंकड़ा छूने के लिए अभी करीब 4.2 इंच पानी और चाहिए। मानसून की आधिकारिक अवधि खत्म होने में अब 13 दिन बाकी हैं।
फिलहाल 20 सितंबर तक प्रदेश में भारी या अति भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। प्रदेश के ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है, जबकि अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। पिछले 24 घंटे में दतिया के सेंवढ़ा में करीब 4 इंच और झाबुआ के शाहपुरा में 3 इंच बारिश दर्ज की गई। बुधवार शाम भोपाल, सीहोर समेत कई इलाकों में भी बारिश हुई। प्रदेश के 32 जिलों में अभी भी सामान्य से कम बारिश है, जबकि 23 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है।
इस मानसून की सबसे बड़ी कहानी जून की कम बारिश है। जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम पानी गिरा था। जुलाई में अच्छी बारिश हुई और अगस्त में भी आंकड़ा सुधरा। इस दौरान दो बार मानसून ब्रेक भी हुआ। अगस्त के बाद सितंबर में हुई तेज बारिश से स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि मानसून के अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद प्रदेश का कुल बारिश आंकड़ा अभी सामान्य से नीचे बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार 21 सितंबर के बाद चक्रवाती परिसंचरण और कम दबाव के क्षेत्र की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसका असर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश के रूप में दिखाई दे सकता है। मानसूनी सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। 30 सितंबर के बाद होने वाली बारिश मानसून के आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं की जाती। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक इस बार मानसून समय पर विदा होने की संभावना है, लेकिन इससे पहले बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।
संपादक: प्रकाश सक्सेना • बुंदेलखंड खबर