महोबा
Mahoba News: एक लाख की आबादी को मिल रही सिर्फ आठ से 10 घंटे बिजली
महोबा जिले के खरेला कस्बे और 40 गांवों में बिजली का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कोयला खदानों में जलभराव और कम आपूर्ति के कारण लोगों को केवल 8 से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है।
ब्रजेश द्विवेदी, चरखारी • महोबा •
मुख्य बातें
- महोबा के खरेला कस्बे और 40 गांवों की एक लाख की आबादी बिजली संकट से जूझ रही है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टर के अनुसार 18 घंटे के बजाय सिर्फ आठ से 10 घंटे बिजली मिल रही है।
- कोयला खदानों में जलभराव और पनकी बिजली स्टेशन से हो रही कटौती के कारण आपूर्ति प्रभावित है।
- अधीक्षण अभियंता एसपी गौतम के अनुसार आवश्यकता से कम बिजली मिलने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है।
महोबा और खरेला क्षेत्र में बिजली संकट गहरा गया है जिससे एक लाख की आबादी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कोयला खदानों में जलभराव से बिजली उत्पादन प्रभावित होने का सीधा असर ग्रामीण इलाकों पर पड़ा है। खरेला कस्बे के 33 केवी पावर हाउस से जुड़ी विद्युत व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।
इस पावर हाउस के अंतर्गत आने वाले खरेला, बसौठ और रिवई फीडर से जुड़े नगर खरेला समेत 40 गांवों में बिजली की भारी किल्लत है। उपभोक्ताओं को 24 घंटे में से केवल आठ से 10 घंटे ही बिजली आपूर्ति मिल पा रही है। इस समस्या से गणेशोत्सव के दौरान पंडालों में आरती और पूजा अंधेरे में करने की नौबत आ गई है।
नियमों और रोस्टर के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली देने का प्रावधान है, लेकिन पिछले 10 दिन से हालात बेहद खराब हैं। बारिश थमने के बाद बढ़ी उमस भरी गर्मी और रात के समय बत्ती गुल रहने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है जिससे स्थानीय लोगों में रोष है।
बिजली कटौती का सीधा असर आम आदमी, किसानों और विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। रातभर बिजली न मिलने से लोग पसीना बहाने को मजबूर हैं। ग्रामीण इलाकों में जल आपूर्ति और दैनिक कार्य भी बाधित हो रहे हैं, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
बिजली निगम के अधीक्षण अभियंता एसपी गौतम ने इस संबंध में बताया कि इस समय बिजली की खपत बढ़ने से मांग में इजाफा हुआ है जबकि ऊपर से आवश्यकता से कम बिजली मिल रही है। पनकी बिजली स्टेशन से कटौती की जा रही है, फिर भी विभाग उपभोक्ताओं को आवश्यकतानुसार बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित कराने का प्रयास कर रहा है।
संपादक: प्रकाश सक्सेना • बुंदेलखंड खबर