ललितपुर
ललितपुर: महिलाओं ने ₹15 हजार से शुरू किया इडली-डोसा का काम, अब कलेक्ट्रेट की प्रेरणा कैंटीन से कमा रहीं ₹30 हजार
ललितपुर के राजघाट से शुरू हुआ महिलाओं का इडली-डोसा कारोबार अब कलेक्ट्रेट परिसर की प्रेरणा कैंटीन तक पहुँच गया है। सभी खर्च निकालने के बाद समूह को हर महीने ₹30 हजार तक की आय हो रही है।
बुंदेलखंड खबर डेस्क • ललितपुर •
मुख्य बातें
- ललितपुर के राजघाट बांध पर बालाजी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इडली-डोसा का कारोबार शुरू किया था।
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ₹1.10 लाख की सामुदायिक निवेश निधि मिलने के बाद काम को गति मिली।
- अक्टूबर 2020 से ललितपुर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रेरणा कैंटीन का संचालन किया जा रहा है।
- सभी खर्च निकालने के बाद अब समूह को हर महीने ₹25 हजार से ₹30 हजार तक की आय हो रही है।
ललितपुर के राजघाट बांध की खूबसूरती देखने आने वाले पर्यटकों को दक्षिण भारतीय व्यंजन खिलाकर अपनी आजीविका शुरू करने वाली महिलाओं का कारोबार अब कलेक्ट्रेट परिसर तक पहुँच गया है। बालाजी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस सफलता के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है।
जखौरा विकास खंड के रानीपुरा के कस्बा राजघाट की रहने वाली महालक्ष्मी, धनलक्ष्मी, सुनीता और दुर्गा के पास इडली, डोसा और बड़े बनाने का हुनर था, लेकिन पूंजी नहीं थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ₹1.10 लाख की सामुदायिक निवेश निधि मिलने पर उन्होंने ₹15 हजार लगाकर काम शुरू किया। अधिकारियों के सहयोग से अक्टूबर 2020 में उन्हें कलेक्ट्रेट परिसर में प्रेरणा कैंटीन चलाने की जिम्मेदारी मिली।
शुरुआत में राजघाट पर पर्यटकों की संख्या कम होने और मौसम सीमित होने के कारण आमदनी कम थी। शुरुआती दौर में सभी खर्च निकालकर समूह को ₹12 हजार से ₹15 हजार की आय होती थी। लेकिन धीरे-धीरे उनके व्यंजनों की चर्चा आसपास फैलने लगी और कलेक्ट्रेट आने वाले कर्मचारी व अधिकारी भी यहाँ पहुँचने लगे।
इस कैंटीन के संचालन से अब ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। बिना किसी बड़े साधन के केवल अपने हुनर के दम पर इन महिलाओं ने अपने परिवारों के लिए नियमित रोजगार का रास्ता तैयार किया है, जिससे अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिल रही है।
समूह की अध्यक्ष सुनीता ने इस सफलता का श्रेय जिला प्रशासन और मिशन प्रबंधन के अधिकारियों को दिया है। आगे भी इस प्रकार के प्रयासों से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके कारोबार को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार सहयोग दिया जा रहा है।
संपादक: प्रकाश सक्सेना • बुंदेलखंड खबर