टीकमगढ़
टीकमगढ़ में भ्रष्टाचार पर वार, दो तहसीलों के बाबू रिश्वतखोरी को लेकर निलंबित, फर्जीवाड़े को लेकर गिरी गाज
टीकमगढ़ जिले में राजस्व कार्यालयों में रिश्वतखोरी और फर्जीवाड़े की शिकायतों पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर ने जतारा और बलदेवगढ़ तहसीलों के दो बाबुओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
बुंदेलखंड खबर डेस्क • टीकमगढ़ •
मुख्य बातें
- जिला प्रशासन ने भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामलों में दो अलग-अलग तहसीलों के बाबुओं को किया निलंबित।
- जतारा तहसील के सहायक वर्ग-3 महेश कुमार तिवारी को संदिग्ध आदेश जारी करने और पैसों के लेन-देन पर हटाया गया।
- बलदेवगढ़ तहसील के रीडर अनिल कुमार नापित को नामांतरण के एवज में तीस हजार रुपये की रिश्वत मांगने पर सस्पेंड किया गया।
- कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय द्वारा की गई इस सख्त प्रशासनिक कार्रवाई से राजस्व महकमे में हड़कंप मच गया है।
टीकमगढ़ जिले के राजस्व कार्यालयों में रिश्वतखोरी, फर्जीवाड़े और आम जनता के साथ बदसलूकी की शिकायतों पर जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने दो अलग-अलग मामलों में गंभीर कदाचरण और अनुशासनहीनता के दोषी पाए गए तहसील कर्मचारियों को 23 Sep 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई से जिले के राजस्व महकमे में हड़कंप मच गया है।
पहला मामला जतारा तहसील का है, जहां पदस्थ सहायक वर्ग-3 महेश कुमार तिवारी पर अपील प्रकरणों के आदेशों की संदिग्ध सत्य प्रतिलिपियां जारी करने, आमजनों से धक्का-मुक्की करने और पैसों के लेन-देन के आरोप साबित हुए हैं। जांच में पाया गया कि बाबू द्वारा जारी कई आदेशों का विवरण राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली में दर्ज ही नहीं था और दस्तावेजों पर मिलान हस्ताक्षर भी गायब थे। इन फर्जी प्रतिलिपियों को निरस्त कर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इंटरनेट मीडिया पर वायरल वीडियो में महेश कुमार तिवारी आमजनों के साथ अभद्रता करते और नकल प्रदाय के एवज में धनराशि का लेन-देन करते दिखाई दिए थे। कारण बताओ नोटिस में आरोप स्वीकार किए जाने के बाद कलेक्टर ने उन्हें निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पलेरा नियत किया है।
दूसरा मामला बलदेवगढ़ तहसील का है, जहां डारगुवां क्षेत्र के रीडर अनिल कुमार नापित को नामांतरण के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित किया गया है। ग्राम एरौरा निवासी एक आवेदक से पिता की मृत्यु के उपरांत वसीयत के आधार पर नामांतरण कराने के बदले 30 हजार रुपये की मांग की गई थी। आवेदक द्वारा बाबू और उसके चालक के साथ हुई बातचीत का ऑडियो इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित कर दिया गया था। एसडीएम द्वारा कराई गई जांच में 7 मिनट 36 सेकेंड के इस ऑडियो की पुष्टि होने और शासकीय कार्य में लेन-देन का मामला सही पाए जाने पर कलेक्टर ने अनिल नापित को निलंबित कर उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय टीकमगढ़ तय किया है।
राजस्व कार्यालयों में इस प्रकार की अनियमितताएं और आम जनता को परेशान करने की घटनाएं लंबे समय से सामने आ रही थीं। कार्यालयों में छोटे कामों के लिए भी आम नागरिकों और किसानों को चक्कर काटने पड़ते थे और पैसे मांगे जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इन मामलों के उजागर होने और वीडियो-ऑडियो प्रमाण सामने आने के बाद प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद से जिले के अन्य तहसीलों और कार्यालयों में भी कर्मचारियों के बीच हड़कंप की स्थिति है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और जनता के साथ अभद्रता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामलों में आगे की विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई प्रक्रिया में है।
संपादक: प्रकाश सक्सेना • बुंदेलखंड खबर