चित्रकूट
मंदाकिनी उफनी, रामघाट में खतरे के निशान के पार जलस्तर: चित्रकूट में 26 दिन में दूसरी बार बाढ़ जैसे हालात
चित्रकूट में पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। 26 दिन में दूसरी बार बाढ़ जैसे हालात बनने पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
बुंदेलखंड खबर डेस्क • चित्रकूट •
मुख्य बातें
- चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर शुक्रवार शाम रामघाट में खतरे के निशान के ऊपर पहुंच गया।
- मंदाकिनी में 26 दिन के भीतर दूसरी बार बाढ़ जैसे हालात बने हैं, जिससे प्रशासन अलर्ट है।
- स्थिति से निपटने के लिए चित्रकूट में SDRF की टीम तैनात की गई है और लगातार निगरानी हो रही है।
- कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और एसपी हंसराज सिंह ने अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की।
पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के चलते सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी एक बार फिर उफान पर है। शुक्रवार शाम उत्तर प्रदेश के रामघाट में नदी का पानी खतरे के निशान को पार कर गया। पानी घाट की सीढ़ियों और आसपास के निचले हिस्सों तक पहुंचने लगा, जिससे जलस्तर बढ़ने पर दुकानदारों ने सामान सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिया। मध्य प्रदेश की ओर 25 सितंबर की रात 8 बजे आरोग्यधाम के पास मंदाकिनी का जलस्तर 135.02 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जो अधिकतम बाढ़ जलस्तर 139.60 मीटर से 4.58 मीटर कम है। गुप्तगोदावरी का जलस्तर भी बढ़ गया है जिससे बहाव काफी तेज है।
बढ़ते पानी के कारण रामघाट में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। शाम ढलने के बाद जलस्तर तेजी से बढ़ा और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई। कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और एसपी हंसराज सिंह शुक्रवार शाम चित्रकूट पहुंचे और अधिकारियों के साथ बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। चित्रकूट में SDRF की टीम तैनात की गई है और नदी किनारे के इलाकों में एनाउंसमेंट कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। कलेक्टर ने बताया कि जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा।
इससे पहले 29 और 30 अगस्त को भी नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था, और 1 सितंबर को फिर बाढ़ आ गई थी। उस दौरान रामघाट समेत कई इलाकों में लोग बाढ़ में फंस गए थे और रेस्क्यू के लिए वायुसेना की मदद लेनी पड़ी थी। मलबे की मिट्टी धुल भी नहीं पाई थी कि दोबारा पानी ने लोगों को अपनी चपेट में ले लिया।
बार बार बाढ़ जैसे हालात बनने से आम जनजीवन और व्यापार पर भारी असर पड़ रहा है। दुकानदारों को बार-बार अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ रहा है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के सामने लगातार सुरक्षा का संकट खड़ा हो गया है। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की आवाजाही रुकने से रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
प्रशासन ने लोगों से नदी और घाट के निचले हिस्सों में नहीं जाने की अपील की है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे जलस्तर बढ़ने की स्थिति में पूरी तरह सतर्क रहें और सुरक्षित जगहों पर रहें। प्रशासन की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
संपादक: प्रकाश सक्सेना • बुंदेलखंड खबर