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महोबा में खाद संकट से किसान परेशान, दिनभर कतार में लगने के बाद भी नहीं मिली खाद

महोबा जिले के कबरई में रबी सीजन की तैयारी के दौरान किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। क्रय-विक्रय केंद्र और सुरहा समिति पर दिनभर लाइन में लगने के बाद किसान खाली हाथ लौटने को मजबूर हुए।

बुंदेलखंड खबर डेस्क • महोबा •

महोबा में खाद संकट से किसान परेशान, दिनभर कतार में लगने के बाद भी नहीं मिली खाद

मुख्य बातें

  • कबरई के क्रय-विक्रय केंद्र पर बृहस्पतिवार को दिनभर कतार में लगने के बाद भी किसानों को खाद नहीं मिली।
  • सुरहा समिति में अनियमितता के आरोपों पर शाम चार बजे हंगामा होने के बाद खाद का वितरण बंद कर दिया गया।
  • गहरा, बघारी, लिलवाही, परसाहा, सुरहा और पिंडारी गांवों के किसानों की बोआई खाद के अभाव में पिछड़ रही है।
  • रामबहोरी, सुनीता, महेंद्र और रामकरण सहित कई किसानों ने कर्मचारियों पर चहेतों को खाद बांटने के आरोप लगाए।

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के कबरई कस्बे में रबी सीजन की तैयारी में जुटे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को क्रय-विक्रय केंद्र पर खाद वितरण की सूचना मिलते ही भोर से किसानों ने डेरा डाल दिया। सुबह से शाम तक लाइन में लगे रहने के बावजूद अधिकांश किसानों को एक बोरी खाद भी नसीब नहीं हुई और वे खाली हाथ घर लौटे।

पुलिस की मौजूदगी में सुबह सात से शाम पांच बजे तक चले वितरण के दौरान किसानों ने समिति के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना था कि कर्मचारियों ने अपने चहेतों और खास लोगों को खाद बांट दी जबकि घंटों कतार में खड़े रहने वाले आम किसान मायूस लौटे। सुरहा समिति में भी अनियमितता के आरोपों के चलते किसानों ने हंगामा किया, जिसके बाद शाम चार बजे वहां खाद का वितरण पूरी तरह बंद कर दिया गया।

साधन सहकारी समिति सुरहा से गहरा, बघारी, लिलवाही, परसाहा, सुरहा और पिंडारी गांव के किसान जुड़े हुए हैं। पिंडारी के किसान महेश को 12 बीघा, लिलवाही के हीरालाल को 13 बीघा, गहरा के मूलचंद्र यादव को 15 बीघा, हल्के प्रजापति को 20 बीघा और ठीहू प्रजापति को 10 बीघा खेत में बोआई करनी है। किसानों ने बताया कि खाद न मिलने से उनकी बोआई का काम पिछड़ रहा है।

समय पर खाद न मिलने का सीधा और बुरा असर आने वाली फसल पर पड़ेगा। खेतों की बोआई में हो रही लगातार देरी से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। एक तरफ जहाँ किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए समितियों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुप्रबंधन के कारण उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।

स्थानीय किसानों को अब अगली खेप आने या प्रशासन द्वारा कोई ठोस व्यवस्था किए जाने का इंतज़ार है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद कालाबाजारी रोकी जाए और सभी को पारदर्शी तरीके से खाद वितरित की जाए ताकि समय पर खेतों की बोआई पूरी हो सके।

संपादक: प्रकाश सक्सेना • बुंदेलखंड खबर