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ग्राम दुलारा में 25 दिन से पानी की सप्लाई बंद: नमामि गंगे योजना में लापरवाही, ग्रामीण बूंद-बूंद को तरसे

महोबा जिले के पनवाड़ी ब्लॉक के ग्राम दुलारा में नमामि गंगे योजना के तहत पेयजल सप्लाई ठप है। ग्रामीण भीषण गर्मी और पानी की कमी से जूझ रहे हैं।

बुंदेलखंड खबर डेस्क • महोबा •

ग्राम दुलारा में 25 दिन से पानी की सप्लाई बंद: नमामि गंगे योजना में लापरवाही, ग्रामीण बूंद-बूंद को तरसे

मुख्य बातें

  • महोबा के पनवाड़ी ब्लॉक के ग्राम दुलारा में 25 दिन से पानी की सप्लाई बंद है।
  • ग्रामीणों का आरोप है कि मीडिया में खबर आने पर ही कुछ दिनों के लिए पानी आता है।
  • संबंधित सुपरवाइजर वीरू ने पाइप फटने की बात कहकर सुधार का भरोसा दिया है।
  • मौके पर लल्लू अहिरवार, चौकीदारनी और रामलखन समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।

महोबा जिले के पनवाड़ी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम दुलारा में नमामि गंगे योजना के तहत पेयजल सप्लाई पिछले 20-25 दिन से पूरी तरह बंद पड़ी है। इस गंभीर समस्या के कारण स्थानीय ग्रामीण भीषण गर्मी के इस दौर में पीने के पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं और बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।

इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने खुलकर अपनी परेशानी साझा की है। इस दौरान मौके पर लल्लू अहिरवार, चौकीदारनी और रामलखन सहित कई अन्य ग्रामीण मौजूद रहे जिन्होंने अपनी बदहाली की दास्तान सुनाई। ग्रामीणों ने बताया कि जब तक मीडिया में इस तरह की समस्याएं नहीं उठाई जातीं, तब तक प्रशासन कोई सुध नहीं लेता।

ग्रामीणों का पुराना अनुभव यही रहा है कि जब मीडिया में खबर प्रकाशित होती है, तभी प्रशासन हरकत में आता है और कुछ दिनों के लिए पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाती है। हालांकि, जैसे ही मामला शांत होता है, वैसे ही पानी की आपूर्ति दोबारा बंद कर दी जाती है, जिससे यह समस्या जस की तस बनी रहती है।

पेयजल आपूर्ति ठप होने से आम जनता और ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन हो गया है। पानी की किल्लत के चलते रोजमर्रा के कामों में भारी बाधा आ रही है, और ग्रामीणों को दूर-दराज के इलाकों से पानी ढोने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और श्रम दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

मामले के तूल पकड़ने पर संबंधित सुपरवाइजर वीरू ने मीडिया और ग्रामीणों के सामने पाइप फटने की बात कबूल की है और जल्द ही इसमें सुधार कराने का भरोसा दिया है। हालांकि ग्रामीणों का यह भी सवाल है कि बिना किसी शिकायत या बाहरी दबाव के जिम्मेदार अधिकारी खुद अपनी जिम्मेदारी समझकर स्वतः एक्शन क्यों नहीं लेते हैं।

संपादक: प्रकाश सक्सेना • बुंदेलखंड खबर